Monsoon 2026 date: IMD के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 तय रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। अंडमान सागर और दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है।
परिस्थितियां अनुकूल होने पर मानसून अगले 2-3 दिनों में और तेजी से आगे बढ़ेगा और 1 जून 2026 के आसपास केरल के तट पर दस्तक दे सकता है।
Monsoon 2026 date: मुख्य बिन्दु
| पॉइंट / स्थिति | मानसून की वर्तमान स्थिति और संभावित तारीखें |
|---|---|
| वर्तमान स्थिति | अंडमान सागर और दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में सक्रिय |
| IMD अपडेट तारीख | 27 मई 2026 |
| अगले 2-3 दिन | दक्षिण अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के अन्य हिस्सों में बढ़ेगा |
| केरल में एंट्री | 27 मई से 1 जून के आसपास (संभावित) |
| बिहार | 15 से 20 जून |
| उत्तर प्रदेश | जून का आखिरी सप्ताह (20-25 जून) |
| दिल्ली-NCR | 27 जून से 2 जुलाई के बीच |
| पंजाब-हरियाणा | जुलाई की शुरुआत (1-5 जुलाई) |
| राजस्थान | जुलाई का पहला सप्ताह (1-8 जुलाई) |
आज मानसून कहां पहुंचा है? (Live Monsoon Status)
26 मई 2026 तक मानसून की उत्तरी सीमा (Northern Limit of Monsoon – NLM) अंडमान निकोबार को पूरी तरह कवर कर चुकी है।
IMD का पूर्वानुमान: अगले 72 घंटों में मानसूनी हवाओं की गति और समुद्री नमी में भारी बढ़ोतरी होगी। इसके कारण दक्षिण अरब सागर, कोमोरिन क्षेत्र (भारत का दक्षिणी छोर) और बंगाल की खाड़ी के मध्य हिस्सों में गतिविधि काफी तेज हो जाएगी, जिससे अंडमान-निकोबार में भारी बारिश जारी रहेगी।

अगले 15 से 30 दिनों में मानसून का सफरनामा (Timeline Structure)
देश के अलग-अलग हिस्सों में मानसून कब और कैसे पहुंचेगा, इसे मौसम विभाग के मॉडल के आधार पर 5 चरणों में समझा जा सकता है:
चरण 1: दक्षिण भारत में आगाज
26 मई – 1 जून
मानसून लक्षद्वीप, केरल, दक्षिण तमिलनाडु और तटीय कर्नाटक में प्रवेश करेगा। इस दौरान तटीय समुद्री इलाकों में ऊंची लहरें उठेंगी और भारी बारिश की शुरुआत होगी।
चरण 2: पूर्वोत्तर में भारी बारिश
1 जून – 10 जून
असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और गोवा में मानसून तेजी पकड़ेगा। बादलों की तेज गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश होगी। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।
चरण 3: मध्य और पूर्वी भारत में एंट्री
10 जून – 20 जून
मानसून महाराष्ट्र (मुंबई सहित), तेलंगाना, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार में दाखिल होगा। इससे तापमान में भारी गिरावट आएगी, हालांकि हवा में उमस (Humidity) थोड़ी बढ़ सकती है। किसानों के लिए यह खरीफ बुवाई का सबसे सटीक समय होगा।
चरण 4: उत्तर भारत की ओर कदम
20 जून – 30 जून
मानसूनी हवाएं झारखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात और पूर्वी उत्तर प्रदेश को कवर करेंगी। इस चरण में प्री-मानसून बारिश, धूल भरी आंधी और बिजली गिरने (वज्रपात) की घटनाएं बढ़ जाती हैं।
चरण 5: उत्तर-पश्चिम भारत में अंतिम पड़ाव
30 जून – 8 जुलाई
दिल्ली-NCR, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में मानसून की औपचारिक एंट्री होगी। इसके साथ ही देश के सबसे गर्म इलाकों से हीटवेव पूरी तरह खत्म हो जाएगी और पारे में 6-8°C तक की बड़ी गिरावट आएगी।
राज्यवार सूची: आपके राज्य में किस तारीख को आएगा मानसून?
| राज्य / क्षेत्र | संभावित तारीख |
| केरल | 1 जून |
| कर्नाटक | 5 जून |
| महाराष्ट्र | 10 जून |
| तेलंगाना | 12 जून |
| ओडिशा | 12 जून |
| छत्तीसगढ़ | 13-15 जून |
| बिहार | 15-20 जून |
| झारखंड | 18 जून |
| पूर्वी यूपी | 20-25 जून |
| दिल्ली-NCR | 27 जून – 2 जुलाई |
| पंजाब-हरियाणा | 1-5 जुलाई |
| राजस्थान | 1-8 जुलाई |
दिल्ली, यूपी और बिहार को कब मिलेगी राहत?
यदि आप विशेष रूप से इन तीन राज्यों के बारे में जानना चाहते हैं, तो एक त्वरित तुलना नीचे दी गई है:
| राज्य | गर्मी से राहत कब? | बारिश की संभावना |
| बिहार | 15 जून के बाद | मानसून के आगमन के साथ भारी मानसूनी बारिश |
| उत्तर प्रदेश | 20 जून के बाद | प्री-मानसून गतिविधियों के साथ गरज-चमक की शुरुआत |
| दिल्ली-NCR | जून के अंतिम दिनों में | मध्यम से तेज बारिश, तापमान में भारी गिरावट |
क्या इस बार मानसून सामान्य रहेगा? जानें वैज्ञानिक कारण
IMD के लॉन्ग रेंज फोरकास्ट (LRF) के अनुसार, साल 2026 में देश में सामान्य (Normal) मानसून रहने की प्रबल संभावना है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों ने दो बड़े वैश्विक कारकों का जिक्र किया है जिन्हें समझना जरूरी है:
- जून में एल नीनो (El Nino) का हल्का असर: जून की शुरुआत में एल नीनो का थोड़ा प्रभाव रह सकता है, जिसके कारण देश के कुछ हिस्सों में शुरुआती बारिश थोड़ी धीमी हो सकती है। (सरल शब्दों में: एल नीनो प्रशांत महासागर के पानी का गर्म होना है, जो अक्सर भारत में बारिश को थोड़ा धीमा कर देता है)।
- जुलाई से ला नीना (La Nina) की वापसी: जुलाई आते-आते ला नीना पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा। (सरल शब्दों में: ला नीना यानी समुद्र के पानी का ठंडा होना, जिसे भारत में अच्छी और भारी बारिश का शुभ संकेत माना जाता है)। इसके सक्रिय होते ही जुलाई और अगस्त में देश भर में जोरदार मानसूनी बारिश होगी।
🚨 भारी बारिश का अलर्ट: किन राज्यों में आ सकती है आफत?
- केरल और तटीय कर्नाटक: लगातार और मूसलाधार बारिश की संभावना।
- कोंकण क्षेत्र (महाराष्ट्र): मुंबई सहित तटीय इलाकों में जलभराव का खतरा।
- असम और मेघालय: अत्यधिक वर्षा के कारण ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों में बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है।
- ओडिशा: तटीय जिलों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश का अनुमान।
मानसून का हमारे जीवन और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
- किसानों को बड़ा फायदा: समय पर मानसून आने से देश में धान, मक्का, बाजरा और सोयाबीन जैसी खरीफ फसलों की बुवाई तेजी से शुरू हो सकेगी।
- बिजली संकट से मुक्ति: तापमान गिरने और मौसम ठंडा होने के कारण घरों व दफ्तरों में AC-कूलर का उपयोग घटेगा, जिससे बिजली की मांग कम होगी और अघोषित बिजली कटौती बंद होगी।
- शहरी इलाकों में जलभराव की चुनौती: मुंबई, दिल्ली, पटना और कोलकाता जैसे महानगरों में शुरुआती मानसूनी बारिश ही नगर निगमों के दावों की पोल खोल सकती है। सड़कों पर जलभराव के कारण ट्रैफिक और उड़ानों पर असर पड़ सकता है।
- पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन: हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में मानसून के आते ही पहाड़ों के खिसकने (Landslides) और अचानक आने वाली बाढ़ (Flash Floods) का खतरा बढ़ जाता है।
किसानों, यात्रियों और आम जनता के लिए जरूरी सलाह
- किसानों के लिए: फसलों की बुवाई करने से पहले अपने जिले के स्थानीय कृषि मौसम बुलेटिन को जरूर देखें। भारी बारिश की चेतावनी वाले दिनों में खेतों में जल निकासी (Drainage) का पुख्ता इंतजाम रखें।
- यात्रियों के लिए: यदि आप जून या जुलाई में पहाड़ी इलाकों या तटीय क्षेत्रों में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो निकलने से पहले मौसम विभाग का ‘रूटीन वेदर अपडेट’ जरूर चेक करें। मछुआरे समुद्र की तरफ न जाएं।
- बिजली गिरने से बचाव (Most Important): उत्तर और पूर्वी भारत में मानसून के आगमन के समय आकाशीय बिजली गिरने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। बारिश या आंधी के दौरान कभी भी खुले मैदान में न जाएं और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।
पिछले साल (2025) के मुकाबले इस बार मानसून कितना अलग?
| पैरामीटर | साल 2025 | साल 2026 (पूर्वानुमान) |
| केरल में एंट्री | 30 मई | 1 जून (संभावित) |
| बिहार में एंट्री | 17 जून | 15-20 जून के बीच |
| दिल्ली में एंट्री | 28 जून | 27 जून से 2 जुलाई के बीच |
निष्कर्ष: पिछले साल के मुकाबले इस साल मानसून का पैटर्न ज्यादा सुव्यवस्थित और मजबूत नजर आ रहा है, जो देश के जल जलाशयों को भरने के लिहाज से सकारात्मक है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. मानसून अभी भारत में कहां तक पहुंचा है?
उत्तर: 26 मई 2026 की ताजा स्थिति के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून अंडमान सागर, निकोबार द्वीप समूह और दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के अधिकांश हिस्सों को कवर कर चुका है।
Q2. दिल्ली-NCR में मानसून की पहली बारिश कब होगी?
उत्तर: दिल्ली में मानसून के 27 जून से 2 जुलाई के बीच पहुंचने की संभावना है। हालांकि, जून के मध्य से ही यहां प्री-मानसून बौछारें पड़ने लगेंगी जिससे लू से राहत मिल जाएगी।
Q3. उत्तर प्रदेश (UP) में मानसून कब तक आएगा?
उत्तर: पूर्वी यूपी (वाराणसी, गोरखपुर) में मानसून 20-25 जून के बीच दस्तक देगा, जबकि लखनऊ और पश्चिमी यूपी (नोएडा, गाजियाबाद) में यह जून के आखिरी दिनों में पहुंचेगा।
Q4. बिहार में इस बार मानसून कब सक्रिय होगा?
उत्तर: बिहार में मानसून की एंट्री 15 से 20 जून के बीच होने की उम्मीद है, जिसके बाद किसानों के लिए धान की रोपनी का काम आसान हो जाएगा।
Q5. राजस्थान में मानसून के पहुंचने की क्या तारीख है?
उत्तर: राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी जिलों (कोटा, झालावाड़) में मानसून 1 से 5 जुलाई के बीच पहुंचेगा, जबकि पश्चिमी हिस्से (जोधपुर, जैसलमेर) तक पहुंचते-पहुंचते 8 जुलाई हो सकती है।
आने वाले 10 से 15 दिन भारत में मानसून की प्रगति के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। दक्षिण भारत में बारिश का दौर शुरू होने जा रहा है, जो धीरे-धीरे मध्य और पूर्वी भारत की तरफ बढ़ेगा।
अगर बंगाल की खाड़ी में मानसूनी सिस्टम मजबूत बना रहता है, तो जून के अंत तक उत्तर भारत को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिल सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बार मानसून की शुरुआत सामान्य से बेहतर रह सकती है, जिससे खेती, जल भंडारण और बिजली संकट जैसी कई समस्याओं में राहत मिलने की उम्मीद है।
(नोट: यह मौसम रिपोर्ट IMD द्वारा 26 मई 2026 को जारी आधिकारिक बुलेटिन और वर्तमान सैटेलाइट मॉडल्स के विश्लेषण पर आधारित है। मौसम में अचानक होने वाले बदलावों के लिए हमारे साथ बने रहें।)