आईएमडी मानसून पूर्वानुमान (IMD Monsoon Forecast June 2026): भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 को लेकर अपना दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण लॉन्ग रेंज फोरकास्ट जारी कर दिया है।
अगर आप भीषण गर्मी से राहत के लिए मानसूनी बौछारों का इंतजार कर रहे हैं, तो मौसम विभाग के ये ताजा आंकड़े आपको सतर्क करने वाले हैं। इस साल देश को कमजोर मानसून (90% LPA) और रिकॉर्डतोड़ गर्मी के दोहरे संकट का सामना करना पड़ सकता है।
प्रशांत महासागर में तेजी से पनप रहा अल-नीनो (El Niño) भारतीय मानसून की रफ्तार को सोखने के लिए तैयार बैठा है, जिससे देश के कई हिस्सों में सूखे, पानी की किल्लत और खेती पर असर पड़ने की शुरुआती चेतावनी (Early Warning) मिल चुकी है।
आईएमडी मानसून 2026 मुख्य बातें
- कुल बारिश का अनुमान: जून से सितंबर 2026 के दौरान पूरे देश में लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) की केवल 90% बारिश होने की संभावना है, जो ‘सामान्य से कम’ (Below Normal) की श्रेणी में आता है।
- सूखे की आशंका: आईएमडी के एडवांस मॉडल के अनुसार, देश में इस साल कम बारिश या सूखा रहने की 84% संभावना है।
- जून में डबल अटैक: जून 2026 में देश भर में औसत बारिश एलपीए के 92% से कम रहेगी और साथ ही भीषण हीटवेव (लू) चलेगी।
- सबसे ज्यादा लू वाले राज्य: उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश में सामान्य से ज्यादा दिनों तक हीटवेव चलेगी।
- खेती पर संकट (Monsoon Core Zone): देश के मुख्य कृषि क्षेत्रों (मध्य और दक्षिण प्रायद्वीप) में बारिश सामान्य से कम (94% से कम) रहने का अनुमान है।
- मौसम का विलेन (El Niño): प्रशांत महासागर में न्यूट्रल स्थितियां खत्म हो रही हैं और मानसून सीजन के दौरान अल-नीनो सक्रिय होने का साफ अनुमान है।
क्षेत्रवार मानसून पूर्वानुमान 2026: आपके राज्य में कितनी होगी बारिश?
आईएमडी के महानिदेशक द्वारा जारी डेटा के अनुसार, भारत का 50 साल का औसत (LPA) 87 सेंटीमीटर है। इस साल इसका केवल 90% पानी ही बरसेगा। देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का वितरण (Spatial Distribution) इस प्रकार रहेगा:
भारत का क्षेत्रवार मानसून ग्राफ
| क्षेत्र (Regions) | संभावित बारिश (LPA का %) | मौसम का मिजाज (Forecast Category) |
| पूर्वोत्तर भारत (Northeast India) | 94% से 106% | सामान्य मानसून (Normal Rainfall) |
| उत्तर-पश्चिम भारत (Northwest India) | 92% से कम | सामान्य से काफी कम (Deficient) |
| मध्य भारत (Central India) | 94% से कम | सामान्य से कम (Below Normal) |
| दक्षिण प्रायद्वीप (South Peninsula) | 94% से कम | सामान्य से कम (Below Normal) |

कृषि क्षेत्र (Monsoon Core Zone) पर सबसे बड़ा जोखिम:
देश के जिन हिस्सों में सिंचाई की व्यवस्था नहीं है और खेती पूरी तरह वर्षा आधारित (Rainfed Agriculture) है, वहां बारिश का आंकड़ा 94% से कम रहेगा। इसका सीधा असर खरीफ फसलों जैसे— धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और तुअर (अरहर) की बुआई पर पड़ेगा।
जून 2026 का मौसम: भयंकर गर्मी और गर्म रातें (Heatwave Outlook)
जून का महीना देश के अधिकांश हिस्सों के लिए परीक्षा की घड़ी होने वाला है। आईएमडी के टेम्परेचर आउटलुक के मुताबिक, इस बार केवल दिन का पारा ही नहीं चढ़ेगा, बल्कि रातें भी सामान्य से ज्यादा गर्म (Above Normal Minimum Temperature) रहेंगी, जिससे लोगों को उमस और हीट स्ट्रेस का सामना करना पड़ेगा।
⚠️ जून में हीटवेव (लू) का राज्यवार अलर्ट
- अत्यधिक खतरे वाले राज्य (Above Normal Heatwave Days): उत्तर प्रदेश (विशेषकर वाराणसी, पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी), बिहार, हरियाणा, पंजाब, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात, आंध्र प्रदेश। इसके साथ ही महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ इलाकों में लू के दिन बढ़ेंगे।
- राहत वाले राज्य (Below Normal Heatwave Days): इस पूरे दौर में राजस्थान और झारखंड में लू के दिनों की संख्या सामान्य से कम रहने की उम्मीद है।
अल-नीनो (El Niño) और आईओडी (IOD) का गणित
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून के कमजोर होने के पीछे वैश्विक समुद्री स्थितियां जिम्मेदार हैं:
- अल-नीनो का ट्रांजिशन: भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर (Equatorial Pacific Region) में वर्तमान में न्यूट्रल स्थिति अब अल-नीनो में बदल रही है। ऐतिहासिक रूप से, जब भी अल-नीनो आता है, भारतीय मानसूनी हवाएं कमजोर हो जाती हैं।
- न्यूट्रल आईओडी (IOD): हिंद महासागर द्विध्रुव (Indian Ocean Dipole) फिलहाल न्यूट्रल है और पूरे सीजन इसके ऐसे ही रहने के आसार हैं। इसका मतलब है कि इसे अरब सागर या बंगाल की खाड़ी से कोई अतिरिक्त सपोर्ट नहीं मिल रहा है।
भारतीय अर्थव्यवस्था, जल संकट और बिजली पर असर
कम मानसून का असर केवल मौसम विभाग के चार्ट तक सीमित नहीं रहता, यह आम आदमी की रसोई और जिंदगी से सीधे जुड़ता है:
- महंगाई की आशंका: धान और दलहन का उत्पादन प्रभावित होने से आने वाले समय में खाद्य पदार्थों की कीमतें (Food Inflation) बढ़ सकती हैं।
- भूजल और पेयजल संकट: बारिश कम होने से नदियों का जलस्तर गिरेगा और ग्राउंड वाटर रिचार्ज नहीं हो पाएगा। छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी की किल्लत बढ़ सकती है।
- बिजली कटौती का डर: भीषण गर्मी के कारण एसी, कूलर और कृषि पंपों के चलने से बिजली की डिमांड रिकॉर्ड स्तर पर होगी, जबकि जलाशयों में पानी कम होने से हाइड्रोपावर (जल विद्युत) का उत्पादन घट सकता है।
उत्तर प्रदेश और वाराणसी (काशी) के लिए क्या हैं संकेत?
उत्तर प्रदेश और खासकर वाराणसी (पूर्वांचल) के क्षेत्रों के लिए आईएमडी की यह प्रेस रिलीज विशेष चेतावनी देती है:
- गंगा बेसिन वाले इस इलाके में जून के दौरान लू का लंबा स्पेल (Long Spell) देखने को मिल सकता है।
- मानसून की एंट्री में देरी हो सकती है, जिससे शुरुआत में धान की नर्सरी बचाना किसानों के लिए बड़ी चुनौती होगी।
- स्थानीय प्रशासन को सलाह दी गई है कि वे अभी से जल स्रोतों का प्रबंधन करें और शहरी इलाकों में कूलिंग सेंटर्स व ओआरएस (ORS) की उपलब्धता सुनिश्चित करें।
कृषि वैज्ञानिकों की सलाह: इस स्थिति से कैसे निपटें?
आईएमडी की इस प्रामाणिक रिपोर्ट के आधार पर कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों और आम नागरिकों के लिए कुछ जरूरी गाइडलाइंस जारी की हैं:
- कम पानी वाली फसलें चुनें: जिन इलाकों में सिंचाई के पक्के साधन नहीं हैं, वहां धान की जगह बाजरा, रागी, मक्का, मूंग या अरहर जैसी फसलों की बुआई करें।
- जल संचयन (Water Harvesting): जून-जुलाई की शुरुआती बारिश की एक-एक बूंद को रोकने के लिए खेतों की मेढ़बंदी दुरुस्त करें।
- बुआई में जल्दबाजी न करें: जब तक आपके क्षेत्र में कम से कम 50-60 मिमी बारिश न हो जाए और मिट्टी में गहराई तक नमी न आ जाए, तब तक खरीफ की बुआई शुरू न करें।
- खुद को बचाएं: दोपहर 12 से 3 बजे के बीच सीधे धूप में काम करने से बचें, पर्याप्त पानी पीते रहें और बुजुर्गों व बच्चों की सेहत पर नजर रखें।
आधाकारिक सोर्स- भारत मौसम विज्ञान विभाग की मासिक बुलेटिन
https://internal.imd.gov.in/press_release/20260529_pr_5028.pdf