2026 का मानसून कैसा रहेगा?
देश में मार्च की बारिश के बीच मानसून को लेकर पहली बड़ी भविष्यवाणी सामने आ गई है। निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट ने साल 2026 के लिए अपना मानसून पूर्वानुमान जारी कर दिया है। जहाँ जून में राहत की उम्मीद है, वहीं अगले तीन महीने चिंता बढ़ाने वाले हो सकते हैं।
भारत की अर्थव्यवस्था और खेती की ‘लाइफलाइन’ कहे जाने वाले मानसून को लेकर इस बार अच्छी खबर नहीं है।
स्काईमेट (Skymet) के मुताबिक, साल 2026 में मानसून ‘सामान्य से कम’ रहने की संभावना है। एजेंसी का अनुमान है कि इस बार लंबी अवधि के औसत (LPA) की केवल 94 फीसदी बारिश ही होगी।
क्या 2026 में मानसून सामान्य से कम रहेगा?
स्काईमेट की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, इस साल चार महीनों (जून से सितंबर) के दौरान औसतन 817 मिलीमीटर बारिश होने की उम्मीद है।
मौसम विज्ञान की भाषा में 96% से 104% बारिश को ‘सामान्य’ माना जाता है, लेकिन 94% का अनुमान इसे ‘सामान्य से कम’ की श्रेणी में डालता है।
हैरान करने वाली बात यह है कि स्काईमेट ने इस साल देश में सूखे (Drought) की 30 फीसदी आशंका जताई है, जबकि सामान्य बारिश की संभावना केवल 20 फीसदी ही है।
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अल नीनो क्या है और यह मानसून को कैसे कमजोर करेगा?
स्काईमेट के मैनेजिंग डायरेक्टर जतिन सिंह के मुताबिक, पिछले काफी समय से सक्रिय ‘ला नीना’ का प्रभाव अब खत्म हो रहा है। प्रशांत महासागर अब ‘ईएनएसओ-न्यूट्रल’ स्थिति में जा रहा है।
मानसून की शुरुआत के साथ ही प्रशांत महासागर में ‘अल नीनो’ (El Niño) विकसित होना शुरू हो जाएगा। इसका असर जुलाई के अंत तक स्पष्ट होने लगेगा। अल नीनो के कारण हवाओं का पैटर्न बदल जाता है, जिससे भारतीय उपमहाद्वीप में बारिश कम हो जाती है।
मानसून का मासिक कैलेंडर: किस महीने कितनी बारिश?
| महीना | LPA का प्रतिशत | स्थिति |
| जून | 101% | सामान्य (राहत की उम्मीद) |
| जुलाई | 95% | सामान्य से कम |
| अगस्त | 92% | कमजोर मानसून |
| सितंबर | 89% | सबसे कम बारिश (सूखे जैसे हालात) |
किन राज्यों में ज्यादा बारिश होगी और कहाँ कम?
मानसून 2026 का वितरण पूरे देश में एक समान नहीं रहने वाला है। स्काईमेट ने भौगोलिक आधार पर भी चेतावनी जारी की है:
- यहाँ होगी अच्छी बारिश: पूर्वी भारत के राज्य जैसे बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा के साथ-साथ उत्तर-पूर्वी राज्यों में सामान्य या उससे अधिक बारिश हो सकती है।
- यहाँ मंडरा रहा है खतरा: पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में मानसून कमजोर रह सकता है। यानी देश के लगभग 60% हिस्से में बारिश की कमी देखी जा सकती है।
क्या IOD अल नीनो के प्रभाव को कम कर पाएगा?
अक्सर ‘इंडियन ओशन डिपोल’ (IOD) मानसून को सहारा देता है, लेकिन इस बार इसके संकेत बहुत मजबूत नहीं हैं। पूर्वानुमान के मुताबिक, IOD फिलहाल सामान्य या हल्का सकारात्मक रह सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को पूरी तरह संतुलित करने में सक्षम नहीं होगा।
कम बारिश का खेती और अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?
भारत में 50 फीसदी से अधिक खेती आज भी मानसून पर निर्भर है। अगर अगस्त और सितंबर के महीनों में, जो खरीफ की फसलों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, बारिश 90% से नीचे रहती है, तो इसका सीधा असर पैदावार पर पड़ेगा। इससे खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
फिलहाल, सबकी निगाहें सरकारी मौसम विभाग (IMD) पर टिकी हैं, जो इस महीने के अंत तक अपना आधिकारिक पूर्वानुमान जारी करेगा।
मानसून 2026: (FAQs)
नहीं, निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट (Skymet) के पूर्वानुमान के अनुसार, 2026 में मानसून ‘सामान्य से कम’ रहने की संभावना है। इस साल लंबी अवधि के औसत (LPA) की लगभग 94% बारिश होने का अनुमान है।
स्काईमेट के मुताबिक, मानसून की शुरुआत के साथ ही प्रशांत महासागर में अल नीनो सक्रिय हो जाएगा, जिसका सबसे नकारात्मक असर जुलाई के अंत से लेकर सितंबर तक दिखाई देगा। इसके कारण देश के कई हिस्सों में बारिश की कमी और सूखे जैसे हालात बन सकते हैं।
पूर्वानुमान के अनुसार, उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के राज्यों में बारिश की सबसे ज्यादा कमी देखी जा सकती है। इसमें पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में मानसून के दूसरे हिस्से (अगस्त-सितंबर) में सूखे की आशंका जताई गई है।
हाँ, स्काईमेट के आंकड़ों के अनुसार जून के महीने में राहत की उम्मीद है। जून में LPA के मुकाबले 101% बारिश होने का अनुमान है, जिसे ‘सामान्य’ श्रेणी में रखा जाता है। हालांकि, मानसून की यह सक्रियता जुलाई से कम होने लगेगी और अगस्त-सितंबर में काफी गिरावट आएगी।
इस साल IOD (Indian Ocean Dipole) के बहुत मजबूत होने के संकेत नहीं हैं। फिलहाल इसके सामान्य या ‘हल्के सकारात्मक’ रहने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह इतना ताकतवर नहीं होगा कि अल नीनो के कारण होने वाली बारिश की कमी को पूरी तरह संतुलित कर सके।